इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए शहीद भगत सिंह से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Bhagat Singh Biography and Interesting Facts in Hindi.

शहीद भगत सिंह का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामशहीद भगत सिंह (Bhagat Singh)
जन्म की तारीख28 सितम्बर
जन्म स्थानलायलपुर, पंजाब (ब्रिटिश भारत)
निधन तिथि23 मार्च
माता व पिता का नामविद्यावती कौर / किशन सिंह
उपलब्धि1926 - भारतीय समाजवादी युवा संगठन
पेशा / देशपुरुष / स्वतंत्रता सेनानी / भारत

शहीद भगत सिंह - भारतीय समाजवादी युवा संगठन (1926)

भगत सिंह भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। भगतसिंह संधु जाट सिक्ख थे वे देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया था उन्हें शायद ही कोई भुला पाए। फांसी के बाद सारे देश ने उनके बलिदान को बड़ी गम्भीरता से याद किया था। भगत सिंह की अंतिम इच्छा थी कि उन्हें गोली मार कर मौत दी जाए। हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने उनकी इस इच्छा को भी नज़रअंदाज़ कर दिया।

भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को लायलपुर, पंजाब में हुआ था। इनका जन्म एक सिक्ख परिवार में किसान परिवार में हुआ था| इनकी माता का नाम विद्यावती कौर और पिता का नाम सरदार किशन सिंह था| इनके पिता खेतो में किसान का कम करते थे और माता घर में ग्रहणी थी|
जेल में भगत सिंह व उनके साथियों ने 64 दिनों तक भूख हडताल की। उनके एक साथी यतीन्द्रनाथ दास ने तो भूख हड़ताल में अपने प्राण ही त्याग दिये थे। 23 मार्च 1931 को शाम में करीब 7 बजकर 33 मिनट पर को लाहौर जेल, पंजाब में भगत सिंह तथा इनके दो साथियों सुखदेव व राजगुरु को फाँसी दे दी गई। फाँसी पर जाने से पहले वे लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे और जब उनसे उनकी आखरी इच्छा पूछी गई तो उन्होंने कहा कि वह लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे और उन्हें वह पूरी करने का समय दिया जाए। कहा जाता है कि जेल के अधिकारियों ने जब उन्हें यह सूचना दी कि उनके फाँसी का वक्त आ गया है तो उन्होंने कहा था- “ठहरिये! पहले एक क्रान्तिकारी दूसरे से मिल तो ले।” फिर एक मिनट बाद किताब छत की ओर उछाल कर बोले – “ठीक है अब चलो।” ॥फाँसी पर जाते समय वे तीनों मस्ती से गा रहे थे – मेरा रँग दे बसन्ती चोला, मेरा रँग दे बसन्ती चोला। माय रँग दे बसन्ती चोला॥
शहीद भगत सिंह के पिता और चाचा करतार सिंह सराभा और हर दयाल के नेतृत्व में ग़दर पार्टी के सदस्य थे। उनके खिलाफ लंबित अदालती मामलों के कारण अजीत सिंह को निर्वासन के लिए मजबूर किया गया था, जबकि स्वर्ण सिंह की 1910 में लाहौर में जेल से रिहाई के बाद मृत्यु हो गई थी। उन्हें क्रांतिकारी का रूप अपने परिवार से विरासत में मिला था। जिसके कारण भगत सिंह लाहौर के खालसा हाई स्कूल में नहीं गए थे। उनके दादा को स्कूल के अधिकारियों की ब्रिटिश सरकार के प्रति वफादारी मंजूर नहीं थी। उन्हें दयानंद एंग्लो-वैदिक हाई स्कूल, आर्य समाजी संस्था में दाखिला दिया गया था। आर्य समाज दर्शन ने उन्हें जीवन भर प्रभावित किया।
शहीद भगत सिंह काल नाम शहीदों की गिनतीं में सबसे ऊपर आता है, जब वे छोटे थे तो बचपन में जब वह अपने पिता के साथ खेत में जाते थे तो पूछते थे कि हम जमीन में बंदूक क्यों नही उपजा सकते। उनके मन में शुरू से ही देश के प्रति प्रेम की भावना थी। जलियावाला बाग हत्याकांड के समय भग़त सिंह की उम्र सिर्फ 12 साल थी। इस घटना ने भगत सिँह को हमेशा के लिए क्रांतिकारी बना दिया था। जिसके बाद उन्होंने अपने कॉलेज के दिनो में ‘राष्ट्रीय युवा संगठन" की स्थापना की थी। काकोरी काण्ड में राम प्रसाद ‘बिस्मिल" सहित 4 क्रान्तिकारियों को फाँसी व 16 अन्य को कारावास की सजाओं से भगत सिंह इतने अधिक उद्विग्न हुए कि पण्डित चन्द्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन से जुड गये और उसे एक नया नाम दिया हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन संगठन का उद्देश्य सेवा, त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले नवयुवक तैयार करना था। जब उनके घरवाले उनकी शादी के लिए लड़की ढूंढ रहे थे तो वह घर से भाग गये तथा यह उन्होंने कहा की "अब तो आजादी ही मेरी दुल्हन बनेगी"। भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जे० पी० सांडर्स को मारा था। इस कार्रवाई में क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी पूरी सहायता की थी। वे एक अच्छे लेखक भी थे, वो उर्दू और पंजाबी भाषा में कई अखबारों के लिए नियमित रूप से लिखते थे। भग़त सिंह ने “इंकलाब जिंदाबाद” और “साम्राज्यवाद का नाश हो” जैसे प्रसिद्ध नारे दिए थे। जेल में भगत सिंह करीब 2 साल रहे। इस दौरान वे लेख लिखकर अपने क्रान्तिकारी विचार व्यक्त करते रहते थे। जेल में रहते हुए भी उनका अध्ययन लगातार जारी रहा। उनके उस दौरान लिखे गये लेख व सगे सम्बन्धियों को लिखे गये पत्र आज भी उनके विचारों के दर्पण हैं। उनके जूते, घड़ी और शर्ट आज भी सुरक्षित हैं। उन्होंने जेल में अंग्रेज़ी में एक लेख भी लिखा जिसका शीर्षक था मैं नास्तिक क्यों हूँ? भगत सिंह और उसके साथियों को फाँसी की सजा इसलिए सुनाई गई क्योकिं उन्होनें नेशनल असेम्बली में बम गिराया था। भगत सिंह को फांसी की सजा सुनाने वाला न्यायाधीश जी.सी. हिल्टन था।

शहीद भगत सिंह प्रश्नोत्तर (FAQs):

शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को लायलपुर, पंजाब (ब्रिटिश भारत) में हुआ था।

शहीद भगत सिंह को 1926 में भारतीय समाजवादी युवा संगठन के रूप में जाना जाता है।

शहीद भगत सिंह की मृत्यु 23 मार्च 1931 को हुई थी।

शहीद भगत सिंह के पिता का नाम किशन सिंह था।

शहीद भगत सिंह की माता का नाम विद्यावती कौर था।

  Last update :  Tue 28 Jun 2022
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