स्वतंत्रता सेनानी

स्वतंत्रता सेनानी सामान्य ज्ञान (Famous Indian Freedom Fighters GK in Hindi): दोस्‍तो इस पोस्ट के माध्यम से आप भारत को आजादी दिलाने वाले देश के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी या क्रांतिकारियों का जीवन परिचय व उनसे संबन्धित महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान जानकारी प्राप्त करेंगे। इस अध्याय में आप शिवराम राजगुरु, खुदीराम बोस,अल्लूरी सीताराम राजू, राम प्रसाद बिस्मिल, शहीद भगत सिंह, डॉ. एनी बेसेंट, मैडम भीखाजी कामा, अरुणा आसफ अली, मंगल पांडे, गोपाल कृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय, मदन मोहन मालवीय, गणेश वासुदेव मावलंकर, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, लक्ष्मी सहगल, सरदार वल्लभभाई पटेल तथा बाल गंगाधर तिलक आदि जैसे प्रमुख क्रांतिकारियों के बारे में ज्ञान अर्जित कर सकते है, जिससे आप आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में देश के स्वतंत्रता सेनानियों से सम्‍बन्धित पूछे जाने प्रश्‍नों की तैयारी ठीक प्रकार से कर सके।

📁 स्वतंत्रता सेनानी (45 विषय मिले)

19-Feb-1630 - 03-Apr-1680 - छत्रपति शिवाजी पश्चिमी भारत के महान योद्धा एवं रणनीतिकार थे, वे मराठा साम्राज्य के संस्थापक भी थे। उन्होंने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। सन 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वह छत्रपति बने थे। स्वतन्त्रता संग्राम में अनेको लोगों ने छत्रपति शिवाजी के जीवनचरित से प्रेरणा लेकर भारत की स्वतन्त्रता के लिये अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया था|

1814 - 18-Apr-1859 - तात्या टोपे को सन 1857 के ‘प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम' के अग्रणीय वीरों में उच्च स्थान प्राप्त है। इन्होने कई जगहों पर अपने सैनिक अभियानों द्वारा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात आदि में अंग्रेज़ी सेनाओं से कड़ी टक्कर ली थी और उन्हें बुरी तरह परेशान कर दिया था।

1777 - 23-Apr-1858 - बाबू कुंवर सिंह को भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में जाना जाता है जो 80 वर्ष की उम्र में भी लड़ने तथा विजय हासिल करने का माद्दा रखते थे। अन्याय विरोधी व स्वतंत्रता प्रेमी बाबू कुंवर सिंह कुशल सेना नायक थे। अपने ढलते उम्र और बिगड़ते सेहत के बावजूद भी उन्होंने कभी भी अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके बल्कि उनका डटकर सामना किया था।

06-May-1861 - 06-Feb-1931 - मोतीलाल नेहरु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के पिता थे। यह एक कश्मीरी ब्राह्मण थे। वे भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के आरम्भिक कार्यकर्ताओं में से थे। मोतीलाल नेहरु आज़ादी के पहले देश में सबसे बुद्धिमान वकीलों में से एक थे। उन्हें सम्मान से पंडित मोतीलाल नेहरू बुलाया जाता था।

09-May-1866 - 19-Feb-1916 - गोपाल कृष्ण गोखले भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, विचारक एवं प्रसिद्ध समाज सुधारक थे। कृष्ण गोखले जी को वित्तीय मामलों की अपार समझ और उस पर अधिकारपूर्वक बहस करने की क्षमता से उन्हें भारत का 'ग्लेडस्टोन' कहा जाता है। इनका मानना था कि वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा भारत की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। स्व-सरकार व्यक्ति की औसत चारित्रिक दृढ़ता और व्यक्तियों की क्षमता पर निर्भर करती है।

13-May-1905 - 11-Feb-1977 - फखरुद्दीन अली अहमद भारत के 5वें राष्ट्रपति (नाम के अनुसार फ़ख़रुद्दीन अली अहमद पाँचवें राष्ट्रपति और कार्यकाल के अनुसार यह छठे राष्ट्रपति) थे। बतौर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली 1974 से 1977 तक पद पर रहे। उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के सहयोग से 29 अगस्त, 1974 को देश का 5वां राष्ट्रपति चुना गया था। फखरुद्दीन अली अहमद डॉ. जाकिर हुसैन के बाद राष्ट्रपति बनने वाले वे दूसरे मुस्लिम व्यक्ति थे।

28-May-1883 - 26-Feb-1966 - विनायक दामोदर सावरकर भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। उन्हें प्रायः वीर सावरकर के नाम से सम्बोधित किया जाता है। यह न सिर्फ क्रन्तिकारी थे बल्कि यह भाषाविद, बुद्धिवादी, कवि, अप्रतिम क्रांतिकारी, दृढ राजनेता, समर्पित समाज सुधारक आदि भी थे। उनके इन्हीं गुणों ने महानतम लोगों की श्रेणी में उच्च पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया था।

27-Jun-1838 - 08-Apr-1894 - बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय बंगाल के प्रकाण्ड विद्वान् तथा महान् कवि और उपन्यासकार थे। 1874 में प्रसिद्ध देश भक्ति गीत वन्देमातरम् की रचना की जिसे बाद में आनन्द मठ नामक उपन्यास में शामिल किया गया था। वन्देमातरम् गीत को सबसे पहले 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था।

04-Jul-1897 - 07-May-1924 - अल्लूरी सीताराम राजू तत्कालीन समय के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी थे। सन 1920 में अल्लूरी सीताराम पर महात्मा गांधी के विचारों का बहुत प्रभाव पड़ा और उन्होंने आदिवासियों को मद्यपान छोड़ने तथा अपने विवाद पंचायतों में हल करने की सलाह दी। किंतु जब एक वर्ष में स्वराज्य प्राप्ति का गांधी जी का स्वप्न साकार नहीं हुआ तो सीताराम राजू ने अपने अनुयायी आदिवासियों की सहायता से अंग्रेज़ों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करके स्वतंत्र सत्ता स्थापित करने के प्रयत्न आंरभ कर दिए।

1823 - 17-Jul-1886 - बेगम ज़ीनत महल मुग़ल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र की पत्नी (बेगम) थी। बेगम ज़ीनत महल ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में स्वातंत्र्य योद्धाओं को संगठित किया और देश प्रेम का परिचय दिया था।

19-Jul-1827 - 08-Apr-1857 - मंगल पांडे का नाम आज भी इतिहास की पुस्तकों में उसी गर्व के साथ दर्ज है जिस गर्व के साथ किसी समय पूरे देश ने उनका साथ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में दिया था। मंगेल पांडे किसी समय ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल नेटिव इंफेन्ट्री के सिपाही हुआ करते थे। उस समय उन्होनें अंग्रेज़ो का विरोध करना जब शुरू किया जब चर्बी वाले करतूसों को सेना से जबर्दस्ती उपयोग में लाये जाने को कहा गया। तत्कालीन अंग्रेजी शासन ने उन्हें बागी करार दिया, जबकि आम हिंदुस्तानी ने उन्हें एक नायक के रूप में देखा। उनके द्वारा भारत के स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर भारत सरकार द्वारा उनके सम्मान में सन् 1984 में एक डाक टिकट भी जारी किया गया था।

23-Jul-1906 - 27-Feb-1931 - चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे। 17 वर्ष के चंद्रशेखर आज़ाद क्रांतिकारी दल ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' में सम्मिलित हो गए थे दल में उनका नाम ‘क्विक सिल्वर' (पारा) रखा गया था। उन्होंने भारत को आजादी दिलाने में अपनी अहम भूमिका अनिभायी थी|

23-Jul-1856 - 01-Aug-1920 - एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। तिलक का जन्म एक सुसंस्कृत, मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक पहले रत्नागिरि में सहायक अध्यापक थे और फिर पूना तथा उसके बाद ‘ठाणे' में सहायक उपशैक्षिक निरीक्षक हो गए थे। वे अपने समय के अत्यंत लोकप्रिय शिक्षक थे। उन्होंने ‘त्रिकोणमिति' और ‘व्याकरण' पर पुस्तकें लिखीं जो प्रकाशित हुईं।

18-Feb-1883 - 17-Aug-1909 - मदन लाल ढींगरा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान् क्रान्तिकारी थे। स्वतंत्र भारत के निर्माण के लिए भारत-माता के कितने शूरवीरों ने हंसते-हंसते अपने प्राणों का उत्सर्ग किया था, उन्हीं महान् शूरवीरों में ‘अमर शहीद मदन लाल ढींगरा' का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखे जाने योग्य है।

24-Aug-1908 - 23-Mar-1931 - शिवराम राजगुरु भारत के प्रसिद्ध वीर स्वतंत्रता सेनानी थे। ये सरदार भगत सिंह और सुखदेव के घनिष्ठ मित्र थे। इन्हें भगत सिंह और सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फाँसी पर लटका दिया गया था। इन्हें देश की आजादी के लिए दी गई राजगुरु की शहादत ने इनका नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित करवा दिया है।

24-Sep-1861 - 13-Aug-1936 - भीकाजी कामा एक महान महिला स्वतंत्रता सेनानी थी। जिन्होंने भारत के बाहर रहते हुए भी देश में आजादी की लढाई शुरू की थी. वे ऐसी प्रथम महीला स्वतंत्रता सेनानी है जिन्होंने इंटरनेशनल असेंबली में भारत का ध्वज लहराया था।

28-Sep-1907 - 23-Mar-1931 - भगत सिंह भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। भगतसिंह संधु जाट सिक्ख थे वे देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया था उन्हें शायद ही कोई भुला पाए। फांसी के बाद सारे देश ने उनके बलिदान को बड़ी गम्भीरता से याद किया था। भगत सिंह की अंतिम इच्छा थी कि उन्हें गोली मार कर मौत दी जाए। हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने उनकी इस इच्छा को भी नज़रअंदाज़ कर दिया।

11-Oct-1902 - 08-Oct-1979 - जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। मातृभूमि के वरदपुत्र जयप्रकाश नारायण ने हमारे देश की सराहनीय सेवा की है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण त्याग एवं बलिदान की प्रतिमूर्ति थे। इन्हें साल 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है।

23-Mar-1910 - 12-Oct-1967 - राम मनोहर लोहिया भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानी, प्रखर चिन्तक तथा समाजवादी राजनेता थे। राम मनोहर लोहिया को भारत एक अजेय योद्धा और महान् विचारक के रूप में देखता है। देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख़ बदल दिया जिनमें एक थे राममनोहर लोहिया थे।

15-Oct-1931 - 27-Jul-2015 - डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पूर्व भारतीय राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता (इंजीनियर) के रूप में विख्यात थे। उन्हें ‘मिसाइल मैन' और ‘जनता के राष्ट्रपति' के नाम से भी जाना जाता है। वह भारत के 11वें निर्वाचित और पहले गैर-राजनीतिज्ञ राष्ट्रपति थे। वे 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक देश के राष्ट्रपति पद पर कार्यरत रहे। 27 जुलाई 2015 को दिल का दौरा पड़ने से इस महान व्यक्ति का निधन हो गया था।

24-Oct-1914 - 23-Jul-2012 - लक्ष्मी सहगल भारत की स्वतंत्रता संग्राम की सेनानी थी। वे आजाद हिन्द फौज की अधिकारी तथा आजाद हिन्द सरकार में महिला मामलों की मंत्री थीं।

12-Feb-1824 - 30-Oct-1883 - महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती आधुनिक भारत के महान चिन्तक, समाज-सुधारक व देशभक्त थे। सरस्वती जी एक संन्यासी तथा एक महान चिंतक थे। उन्होंने वेदों की सत्ता को सदा सर्वोपरि माना था। इन्होने ही सबसे पहले 1876 में ‘स्वराज्य' का नारा दिया जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने आगे बढ़ाया था। उन्होंने वैदिक विचारधाराओं को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम किया। इसके बाद, दार्शनिक और भारत के राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन ने उन्हें “आधुनिक भारत के निर्माता” में से एक कहा, जैसा कि श्री अरबिंदो ने किया था।

03-Nov-1900 - 04-Apr-1946 - सागरमल गोपा भारत के स्वतन्त्रता सेनानी एवं देशभक्त थे। वे जैसलमेर, राजस्थान के निवासी थे। सागरमल गोपा प्रतिबन्धित प्रजामण्डल के नेता थे। राजस्थान के सपूत गोपा के बलिदान से जैसलमेर तथा निकटवर्ती क्षेत्र की जनता को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरणा मिली थी।

05-Nov-1870 - 16-Jun-1925 - चित्तरंजन दास एक प्रसिद्द भारतीय नेता, राजनीतिज्ञ, वकील, कवि तथा पत्रकार थे। एक महत्वपूर्ण राष्ट्रवादी नेता के साथ-साथ वो एक सफल विधि-शास्त्री भी थे। स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान उन्होंने ‘अलीपुर षड़यंत्र काण्ड' (1908) के अभियुक्त अरविन्द घोष का बचाव किया था। चित्तरंजन दास ने अपनी चलती हुई वकालत छोड़कर गांधीजी के असहयोग आंदोलन में भाग लिया और पूर्णतया राजनीति में आ गए थे।

24-Oct-1775 - 07-Nov-1862 - बहादुर शाह जफर मुग़ल साम्राज्य के अंतिम बादशाह और उर्दू के जानेे-माने शायर थे। इनका शासनकाल 1837-57 तक था। बहादुर शाह ज़फ़र एक कवि, संगीतकार व खुशनवीस थे और राजनीतिक नेता के बजाय सौंदर्यानुरागी व्यक्ति अधिक थे।

07-Nov-1858 - 20-May-1932 - बिपिन चंद्र पाल का नाम भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में ‘क्रान्तिकारी विचारों के जनक' के रूप में आता है, जो अंग्रेज़ों की चूलें हिला देने वाली ‘लाल' ‘बाल' ‘पाल' तिकड़ी का एक हिस्सा थे।

27-Mar-1915 - 09-Nov-2003 - पुष्पलता दास एक उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्य असम एक भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, गांधीवादी और विधायक थी। उन्होंने कस्तूरबा गांधी नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट और खादी एंड ग्राम इंडस्ट्रियल कमिशन के असम अध्याय के अध्यक्ष के रूप में सेवा की थी।

09-Nov-1877 - 21-Apr-1938 - मोहम्मद इक़बाल अविभाजित भारत के प्रसिद्ध कवि, नेता और दार्शनिक थे। उर्दू और फ़ारसी में इनकी शायरी को आधुनिक काल की सर्वश्रेष्ठ शायरी में गिना जाता है। इक़बाल मसऊदी ने हिंदुस्तान की आज़ादी से पहले 'तराना-ए-हिन्द' लिखा था, जिसके प्रारंभिक बोल- 'सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा' थे |

10-Nov-1848 - 06-Aug-1925 - सुरेन्द्रनाथ बनर्जी प्रसिद्ध स्वाधीनता सेनानी थे। उन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान प्रारंभिक दौर के भारतीय राजनीतिक नेताओं में से एक थे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय समिति की स्थापना की, जो प्रारंभिक दौर के भारतीय राजनीतिक संगठनों में से एक था और बाद में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता बन गए।

19-Nov-1828 - 18-Jun-1858 - रानी लक्ष्मीबाई मराठा शासित झांसी की रानी और भारत की स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम वनिता थीं। भारत को दासता से मुक्त करने के लिए सन् 1857 में बहुत बड़ा प्रयास हुआ। इन्होने मात्र 23 वर्ष की आयु में अंग्रेज़ साम्राज्य की सेना से संग्राम किया और रणक्षेत्र में वीरगति प्राप्त की किन्तु जीते जी अंग्रेजों को अपनी झाँसी पर क़बजा नहीं करने दिया।

03-Dec-1889 - 11-Aug-1908 - खुदीराम बोस केवल 19 साल की उम्र में हिन्दुस्तान की आज़ादी के लिये फाँसी पर चढ़ने वाले क्रांतिकारी थे। खुदीराम बोस राजनीतिक गतिविधियों में स्कूल के दिनों से ही भाग लेने लगे थे। उन दिनों अंग्रेज़ों से छोटे-छोटे हिन्दुस्तानी स्कूली बच्चे भी नफ़रत किया करते थे। वे जलसे जलूसों में शामिल होते थे तथा अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ नारे लगाते थे।

14-Apr-1891 - 06-Dec-1956 - भीमराव आम्बेडकर जी एक बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी भी थे। उन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है। आम्बेडकर ने अपना सारा जीवन हिन्दू धर्म की चतुवर्ण प्रणाली और भारतीय समाज में सर्वत्र व्याप्त जाति व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष में बिता दिया था। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और दलितों के खिलाफ सामाजिक भेद भाव के विरुद्ध अभियान चलाया। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री एवं भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार थे।

08-Dec-1897 - 29-Apr-1960 - पंडित कवि बालकृष्ण शर्मा नवीन हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध भारतीय कवि, गद्यकार और अद्वितीय वक्ता थे। पढ़ाई छोड़ने के बाद बालकृष्ण शर्मा नवीन पूरी तरह देश भक्ति के रंग में रंग गए तथा राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लेने के कारण इनकी पहली गिरफ्तारी 1921 में प्रयाग में हुई। इनके जेल के साथियों में पंडित जवाहरलाल नेहरु, राजर्षि, पुरुषोतम टंडन, देवदास गांधी आदि राष्ट्रनेता थे।

22-Oct-1900 - 19-Dec-1927 - अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ को भारत के प्रसिद्ध अमर शहीद क्रांतिकारियों में गिना जाता है। देश की आज़ादी के लिए उन्होंने हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर कर दिए थे। अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर थे। इन्होने काकोरी कांड में अहम् भूमिका निभाई थी।

11-Jun-1897 - 19-Dec-1927 - राम प्रसाद बिस्मिल भारत के महान् स्वतन्त्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाविद् व साहित्यकार भी थे। इन्होने भारत की आज़ादी के लिये फांसी के फंदे पर चढ़ गये थे। तथा जब-जब भारत में क्रांतिकारियों की बात होगी इस महान आदमी का नाम ज़रूर आएगा।

25-Dec-1861 - 12-Nov-1946 - मदन मोहन मालवीय महान् स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि एक बड़े समाज सुधारक भी थे। इतिहासकार वीसी साहू के अनुसार हिन्दू राष्ट्रवाद के समर्थक मदन मोहन मालवीय देश से जातिगत बेड़ियों को तोड़ना चाहते थे। मालवीय जी सत्य, ब्रह्मचर्य, व्यायाम, देशभक्ति तथा आत्मत्याग में ज्यादा प्रसिद थे।

26-Dec-1899 - 31-Jul-1940 - उधम सिंह का नाम भारत की आज़ादी की लड़ाई में पंजाब के क्रान्तिकारी के रूप में दर्ज है। शहीद उधम सिंह ने जलियाँवाला के कांड के लिए प्रतिज्ञा ली थी की। वह जनरल डायर को मारेंगे तथा ऐसा उन्होंने लंदन की एक असेंबली में कर दिया था।

09-Sep-1850 - 06-Jan-1885 - भारतेन्दु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह कहा जाता हैं। बाबू भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म काशी नगरी के प्रसिद्ध ‘सेठ अमीचंद' के वंश में 09 सितम्बर सन् 1850 को हुआ था। वे हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे। हिंदी पत्रकारिता, नाटक और काव्य के क्षेत्र में उनका बहुमूल्य योगदान रहा है। भारतेन्दु के नाटक लिखने की शुरुआत बंगला के विद्यासुंदर (1867) नाटक के अनुवाद से होती है।

12-Jan-1863 - 04-Jul-1902 - स्वामी विवेकानंद वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा था।

18-Jan-1842 - 16-Jan-1901 - महादेव गोविन्द रानाडे एक ब्रिटिश काल के भारतीय न्यायाधीश, लेखक एवं समाज-सुधारक थे। उन्हें “महाराष्ट्र का सुकरात” कहा जाता है। रानाडे ने समाज सुधार के कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। प्रार्थना समाज, आर्य समाज और ब्रह्म समाज का इनके जीवन पर बहुत प्रभाव था।

25-May-1886 - 21-Jan-1945 - रास बिहारी बोस एक भारतीय क्रान्तिकारी थे, जिन्होने अंग्रेजी हुकुमत के विरुद्ध ‘गदर' एवं ‘आजाद हिन्द फौज' के संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न सिर्फ देश के अन्दर बल्कि दूसरे देशों में भी रहकर अँगरेज़ सरकार के विरुद्ध क्रान्तिकारी गतिविधियों का संचालन किया और ताउम्र भारत को स्वतन्त्रता दिलाने का प्रयास करते रहे।

23-Jan-1897 - 18-Aug-1945 - सुभाषचंद्र बोस के अलावा भारत के इतिहास में ऐसा कोई व्यक्ति ने जन्म नही लिया, जो एक साथ महान् सेनापति, वीर सैनिक, राजनीति का अद्भुत खिलाड़ी और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरुषों, नेताओं के समकक्ष साधिकार बैठकर कूटनीति तथा चर्चा करने वाला हो। नेताजी में सच्चाई के सामने खड़े होने की अद्भुत क्षमता थी।

28-Jan-1865 - 17-Nov-1928 - लाला लाजपत राय भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। इन्हें पंजाब केसरी भी कहा जाता है। इन्होंने पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना भी की थी। ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक थे।

02-Oct-1869 - 30-Jan-1948 - महात्मा गांधी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। वह एक ऐसे नेता थे जो भारत की स्वतंत्रता को अहिंसा से दिलाना चाहते थे। उनकी माता का नाम पुतलीबाई गाँधी था तथा वह परनामी वैश्य समुदाय की थीं।

14-Oct-1884 - 04-Mar-1939 - लाला हरदयाल जी एक प्रसिद्द भारतीय क्रांतिकारी थे। विदेशों में भटकते हुए अनेक कष्ट सहकर लाला हरदयाल जी ने देशभक्तों को भारत की आज़ादी के लिए प्रेरित व प्रोत्साहित किया था। उन्होंने अपने सरल जीवन और बौद्धिक कौशल के कारण प्रथम विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध लड़ने के लिए कनाडा और अमेरिका में रहने वाले अनेक भारतीय प्रवासीयो को प्रेरित किया था|