इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे मैडम भीकाजी कामा (Bhikaiji Cama) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए मैडम भीकाजी कामा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Bhikaiji Cama Biography and Interesting Facts in Hindi.

मैडम भीकाजी कामा का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नाममैडम भीकाजी कामा (Bhikaiji Cama)
वास्तविक नामभीकाजी रुस्तम कामा
जन्म की तारीख24 सितम्बर
जन्म स्थानबम्बई, (भारत)
निधन तिथि13 अगस्त
उपलब्धि - भारत में प्रथम क्रान्तिकारी महिला
पेशा / देशमहिला / स्वतंत्रता सेनानी / भारत

मैडम भीकाजी कामा - भारत में प्रथम क्रान्तिकारी महिला

भीकाजी कामा एक महान महिला स्वतंत्रता सेनानी थी। जिन्होंने भारत के बाहर रहते हुए भी देश में आजादी की लढाई शुरू की थी. वे ऐसी प्रथम महीला स्वतंत्रता सेनानी है जिन्होंने इंटरनेशनल असेंबली में भारत का ध्वज लहराया था।

मैडम भीकाजी कामा का जन्म 24 सितम्बर 1861 को बम्बई(भारत ) में एक पारसी परिवार हुआ था| इनका पूरा नाम भीकाजी रुस्तम कामा था। इनके पिता का नाम सोराबजी फ्रामजी पटेल और माता का नाम जयजीबाई सोराबजी पटेल था| इनके पिता एक वकील प्रशिक्षण का कम करते थे और पेशे से एक प्रसिद व्यापारी भी थे|
मैडम भीकाजी कामा की मृत्यु 13 अगस्त 1936 (आयु 74 वर्ष) को बॉम्बे, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत में गुमनामी की हालत के कारण इनका निधन हुआ।
मैडम कामा ने श्रेष्ठ समाज सेवक दादाभाई नौरोजी के यहां सेक्रेटरी के पद पर कार्य किया था। मैडम भीकाजी कामा ने भारत का पहला झंडा फहराया, उसमें हरा, केसरिया तथा लाल रंग के पट्टे थे। साथ ही उसमें बीच में देवनागरी लिपि में वंदे मातरम लिखा हुआ था। कामा का ध्वज, कलकत्ता ध्वज का एक संशोधन, कामा और विनायक दामोदर सावरकर द्वारा सह-डिज़ाइन किया गया था। भीकाजी कामा ने 22 अगस्त 1907 को जर्मनी में हुई इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांफ्रेंस में भारतीय स्वतंत्रता के ध्वजभारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज को बुलंद किया था। भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज आज भी गुजरात के भावनगर स्थित सरदारसिंह राणा के पौत्र और भाजपा नेता राजुभाई राणा (राजेन्द्रसिंह राणा) के घर सुरक्षित रखा गया है। फ्रांसीसी अखबारों में उनका चित्र जोन ऑफ आर्क के साथ आया। यह इस तथ्य की भावपूर्ण अभिव्यक्ति थी कि श्रीमती कामा का यूरोप के राष्ट्रीय तथा लोकतांत्रिक समाज में विशिष्ट स्थान था। श्रीमती कामा की लड़ाई दुनिया-भर के साम्रज्यवाद के विरुद्ध थी।
कई भारतीय शहरों में सड़कों और स्थानों का नाम भीखाजी कामा या मैडम कामा के नाम पर रखा गया है। 26 जनवरी 1962 को, भारत के 11 वें गणतंत्र दिवस पर, भारतीय डाक और तार विभाग ने उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया।

मैडम भीकाजी कामा प्रश्नोत्तर (FAQs):

मैडम भीकाजी कामा का जन्म 24 सितम्बर 1861 को बम्बई, (भारत) में हुआ था।

मैडम भीकाजी कामा को में भारत में प्रथम क्रान्तिकारी महिला के रूप में जाना जाता है।

मैडम भीकाजी कामा का पूरा नाम भीकाजी रुस्तम कामा था।

मैडम भीकाजी कामा की मृत्यु 13 अगस्त 1936 को हुई थी।

  Last update :  Tue 28 Jun 2022
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