खान अब्दुल गफ्फार ख़ान का जीवन परिचय | Biography of Khan Abdul Ghaffar Khan in Hindi

खान अब्दुल गफ्फार ख़ान का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे खान अब्दुल गफ्फार ख़ान (Khan Abdul Ghaffar Khan) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए खान अब्दुल गफ्फार ख़ान से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Khan Abdul Ghaffar Khan Biography and Interesting Facts in Hindi.

खान अब्दुल गफ्फार ख़ान के बारे में संक्षिप्त जानकारी

नामखान अब्दुल गफ्फार ख़ान (Khan Abdul Ghaffar Khan)
उपनामफख्र-ए अफगान, बच्चा खान, बादशाह ख़ान
जन्म की तारीख06 फरवरी 1890
जन्म स्थानपेशावर, पाकिस्तान
निधन तिथि20 जनवरी 1988
पिता का नाम बैराम खान
उपलब्धि1987 - भारत रत्न प्राप्त करने वाले प्रथम विदेशी व्यक्ति
पेशा / देशपुरुष / राजनीतिज्ञ / पाकिस्तान

खान अब्दुल गफ्फार ख़ान (Khan Abdul Ghaffar Khan)

ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान एक महान् राजनेता थे जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था। ब्रिटिश सरकार से आजादी के लिए संघर्षरत ‘स्वतंत्र पख्तूनिस्तान" आंदोलन के प्रणेता थे। अब्दुल गफ्फार खान एक राजनैतिक और आध्यात्मिक नेता थे जिन्हें महात्मा गाँधी की तरह उनके अहिंसात्मक आन्दोलन के लिए जाना जाता है। उनका लक्ष्य संयुक्त, स्वतन्त्र और धर्मनिरपेक्ष भारत बनाने का था। इसके लिये उन्होने 1930 में खुदाई खिदमतगार नाम के संग्ठन की स्थापना की। और यह संगठन "सुर्ख पोश"(या लाल कुर्ती दल ) के नाम से भी जान जाता है।

खान अब्दुल गफ्फार ख़ान का जन्म

ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान का जन्म 06 फ़रवरी, 1890 ई. को पेशावर, तत्कालीन ब्रिटिश भारत वर्तमान पाकिस्तान में हुआ था। इनके पिता का नाम बैराम खान और इनके दादा का नाम सैफुल्ला खां था। इनके पिता बैराम खान का स्वभाव कुछ भिन्न था। वे शांत स्वभाव के थे और ईश्वरभक्ति में लीन रहा करते थे। अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान को “सीमान्त गांधी”, “बच्चा खाँ” तथा “बादशाह खान” जैसे उपनामों से भी जाना जाता है।

खान अब्दुल गफ्फार ख़ान का निधन

सन 1988 में पाक़िस्तान सरकार ने खान अब्दुल गफ्फार ख़ान को पेशावर में उनके घर में नज़रबंद कर दिया गया। 20 जनवरी 1988 को उनकी मृत्यु हो गयी और उनकी अंतिम इच्छानुसार उन्हें जलालाबाद अफ़ग़ानिस्तान में दफ़नाया गया।

खान अब्दुल गफ्फार ख़ान की शिक्षा

अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ‘मिशनरी स्कूल" से प्राप्त की। मिशनरी स्कूल की पढ़ाई समाप्त करने के बाद वे अलीगढ़ आ गए। गर्मी की छुट्टियों में समाजसेवा करना उनका मुख्य काम था। शिक्षा समाप्त कर वह देशसेवा में लग गए।

खान अब्दुल गफ्फार ख़ान का करियर

वर्ष 1919 में रॉलेट एक्ट के ख़िलाफ़ हुए आंदोलन के दौरान ग़फ़्फ़ार ख़ां की गांधी जी से मुलाक़ात हुई और उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। अगले वर्ष वह ख़िलाफ़त आंदोलन में शामिल हो गए। वर्ष 1919 में अंग्रेज़ों ने जब पेशावर में ‘फ़ौजी क़ानून" (मार्शल लॉ) लगाया। तब अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान ने अंग्रेज़ों के सामने शांति का प्रस्ताव रखा, फिर भी उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था। 1930 ई. में सत्याग्रह करने पर वे पुन: जेल भेजे गए और उनका तबादला गुजरात (पंजाब) के जेल में कर दिया गया। वहाँ आने के पश्चात् उनका पंजाब के अन्य राजबंदियों से परिचय हुआ। जेल में उन्होंने सिख गुरूओं के ग्रंथ पढ़े और गीता का अध्ययन किया। हिंदु तथा मुसलमानों के आपसी मेल-मिलाप को जरूरी समझकर उन्होंने गुजरात के जेलखाने में गीता तथा कुरान के दर्जे लगाए, जहाँ योग्य संस्कृतज्ञ और मौलवी संबंधित दर्जे को चलाते थे। उनकी संगति से अन्य कैदी भी प्रभावित हुए और गीता, कुरान तथा ग्रंथ साहब आदि सभी ग्रंथों का अध्ययन सबने किया। 1934 ई. में जेल से छूटने पर दोनों भाई वर्धा में रहने लगे। और इस बीच उन्होंने सारे देश का दौरा किया। कांग्रेस के निश्चय के अनुसार 1939 ई. में प्रांतीय कौंसिलों पर अधिकार प्राप्त हुआ तो सीमाप्रांत में भी कांग्रेस मंत्रिमडल उनके भाई डॉ॰ खान के नेतृत्व में बना लेकिन स्वयं वे उससे अलग रहकर जनता की सेवा करते रहे। 1942 ई. के अगस्त आंदोलन के सिलसिले में वे गिरफ्तार किए गए और 1947 ई. में छूटे। साल 1921 में वह अपने गृह प्रदेश पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में ख़िलाफ़त कमेटी के ज़िला अध्यक्ष चुने गए। एक समय उनका लक्ष्य संयुक्त, स्वतन्त्र और धर्मनिरपेक्ष भारत था। इसके लिये उन्होने 1930 में खुदाई खिदमतगार नाम के संग्ठन की स्थापना की। यह संगठन "सुर्ख पोश"(या लाल कुर्ती दल ) के नाम से भी जाने जाता है।

खान अब्दुल गफ्फार ख़ान के पुरस्कार और सम्मान

वर्ष 1987 में भारत सरकार की ओर से ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न" से सम्मानित किया गया था। वे इस सम्मान को पाने वाले पहले विदेशी नागरिक थे।

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नीचे दिए गए प्रश्न और उत्तर प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं। यह भाग हमें सुझाव देता है कि सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। यह प्रश्नोत्तरी एसएससी (SSC), यूपीएससी (UPSC), रेलवे (Railway), बैंकिंग (Banking) तथा अन्य परीक्षाओं में भी लाभदायक है।

महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर (FAQs):


  • प्रश्न: किसको “सीमान्त गांधी”, “बच्चा खाँ” तथा “बादशाह खान” जैसे उपनामों से जाना जाता है?
    उत्तर: ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान
  • प्रश्न: खुदाई खिदमतगार नाम के संगठन की स्थापना कब हुई थी?
    उत्तर: 1920
  • प्रश्न: अंग्रेज़ों ने पेशावर में ‘फ़ौजी क़ानून’ (मार्शल लॉ) कब लगाया था?
    उत्तर: 1919
  • प्रश्न: ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से कब सम्मानित किया गया था?
    उत्तर: 1987
  • प्रश्न: भारत रत्न प्राप्त करने वाले प्रथम विदेशी व्यक्ति कौन थे?
    उत्तर: ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान

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