चैत्र नवरात्रि 2021 – त्यौहार का अर्थ, इतिहास एवं महत्व

✅ Published on March 7th, 2021 in भारतीय त्यौहार, महत्वपूर्ण दिवस

चैत्र नवरात्रि के बारे में सामान्य ज्ञान: (Chaitra Navratri Festival Information in Hindi)

चैत्र नवरात्रि 2021 की तारीख:

चैत्र नवरात्रि का पर्व धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। माघ नवरात्रि के बाद चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस 2021 में चैत्र नवरात्रि का पर्व 13 अप्रैल से आरंभ हो रहा है। वहीं चैत्र नवरात्रि का समापन 22 अप्रैल 2021 को किया जाएगा। नवरात्रि का पर्व उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, बंगाल सहित संपूर्ण भारत में श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया जाता है।

नवरात्रि का अर्थ:

नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति/देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्रि:

नवरात्र भारत में हिंदूओं द्वारा मनाया जाने प्रमुख पर्व है। वैसे तो एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में कुल मिलाकर चार बार नवरात्र आते हैं, लेकिन इनमें से चैत्र और आश्विन नवरात्र सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। ऐसा कहा जाता है कि चैत्र नवरात्र के पहले मां आद्यशक्ति अवतरित हुर्इ थीं। ब्रह्म पुराण के अनुसार, देवी ने ब्रह्माजी को सृष्टि निर्माण करने के लिए कहा था।

बसंत ऋतु में होने के कारण चैत्र नवरात्र को बसंत, बासंती या वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है। उल्लेखनीय है कि चैत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों के साथ ही हिन्दू नववर्ष के पंचांग की गणना की जाती है। नौ दिनों तक चलने इस पूजा में तक देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों आराधना की जाती है। मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि मां के नौ अलग-अलग रुप हैं। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इसके बाद लगातार नौ दिनों तक मां की पूजा व उपवास किया जाता है।

नवरात्र के इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के इन नौ स्वरूपों आराधना की जाती है:-

  • नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
  • नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।
  • नवरात्र के तीसरे दिन देवी दुर्गा के चन्द्रघंटा रूप की आराधना की जाती है।
  • नवरात्र के चौथे दिन माता के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा जी की आराधना की जाएगी।
  • नवरात्र के पांचवें दिन भगवान कार्तिकेय की माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है।
  • नारदपुराण के अनुसार शुक्ल पक्ष यानि चैत्र नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है।
    नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है।
  • नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं।
  • नवरात्र के नौवें दिन भगवती के देवी सिद्धदात्री स्वरूप का पूजन किया जाता है। सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्र में नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान पूर्ण हो जाता है।

नवरात्रि पूजा विधि:

नवरात्रि की पूजा में सर्वप्रथम एक स्वच्छ स्थान पर मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौ, सप्तधान्य बोएं। फिर उनके ऊपर अपनी इच्छानुसार सोने, तांबे अथवा मिट्टी के कलश की स्थापना करें। कलश के ऊपर सोना, चांदी, तांबा, मिट्टी, पत्थर या चित्रमयी मूर्ति रखें। मूर्ति यदि कच्ची मिट्टी, कागज या सिंदूर आदि से बनी हो और स्नानादि से उसमें विकृति आने की संभावना हो तो उसके ऊपर शीशा लगा दें। इसके बाद कलश पर स्वस्तिक बनाकर दुर्गाजी का चित्र पुस्तक तथा शालिग्राम को विराजित कर भगवान विष्णु की पूजा करें।

नवरात्र व्रत के आरंभ में स्वस्तिक वाचन-शांतिपाठ करके संकल्प करें और सबसे पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा कर मातृका, लोकपाल, नवग्रह व वरुण का सविधि पूजन करें। फिर मुख्य मूर्ति की पूजा करें। दुर्गादेवी की आराधना-अनुष्ठान में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का पूजन तथा मार्कण्डेयपुराणान्तर्गत निहित श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ नौ दिनों तक रोजाना करना चाहिए।

चैत्र नवरात्रि का महत्व:

चैत्र नवरात्र का ज्योत‌िष की दृष्ट‌ि से व‌‌िशेष महत्व है क्योंक‌ि चैत्र नवरात्र के दौरान सूर्य का राश‌ि पर‌िवर्तन होता है। सूर्य 12 राश‌ियों में भ्रमण पूरा करते हैं और फ‌िर से अगला चक्र पूरा करने के ल‌िए पहली राश‌ि मेष में प्रवेश करते हैं। सूर्य और मंगल की राश‌ि मेष दोनों ही अग्न‌ि तत्व वाले हैं इसल‌िए इनके संयोग से गर्मी की शुरुआत होती है। चैत्र नवरात्र से नववर्ष के पंचांग की गणना शुरू होती है। इसी द‌िन से वर्ष के राजा, मंत्री, सेनापत‌ि, वर्षा, कृष‌ि के स्वामी ग्रह का न‌िर्धारण होता है और वर्ष में अन्न, धन, व्यापार और सुख शांत‌ि का आंकलन क‌िया जाता है। नवरात्र में देवी और नवग्रहों की पूजा का कारण यह भी है क‌ि ग्रहों की स्थ‌ित‌ि पूरे वर्ष अनुकूल रहे और जीवन में खुशहाली बनी रहे। धार्म‌िक दृष्ट‌ि से नवरात्र का अपना अलग ही महत्व है क्योंक‌ि इस समय आद‌िशक्त‌ि ज‌िन्होंने इस पूरी सृष्ट‌ि को अपनी माया से ढ़का हुआ है ज‌िनकी शक्त‌ि से सृष्ट‌ि का संचलन हो रहा है जो भोग और मोक्ष देने वाली देवी हैं वह पृथ्वी पर होती है इसल‌िए इनकी पूजा और आराधना से इच्छ‌ित फल की प्राप्त‌ि अन्य द‌िनों की अपेक्षा जल्दी ‌होती है।

Previous « Next »

❇ सामान्य ज्ञान अध्ययन से संबंधित विषय

अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस (12 मई) – International Nurses Day (12 May) मातृ दिवस (मई माह का दूसरा रविवार) – Mothers Day (Second Sunday of May) विश्व रेडक्रॉस दिवस (08 मई) – World Red Cross Day (08 May) विश्व अस्थमा दिवस (मई माह का पहला मंगलवार) – World Asthma Day (First Tuesday of May) विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (03 मई) – World Press Freedom Day (03 May) विश्व हास्य दिवस – World Comedy Day अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (01 मई) – International Labor Day (01 May) अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस (29 अप्रैल) – International Dance Day (29 April) विश्व मलेरिया दिवस (25 अप्रैल) – World Malaria Day (25 April) राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल) – National Panchayati Raj Day (24 April)