बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय | Biography of Bal Gangadhar Tilak in Hindi
बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय | Biography of Bal Gangadhar Tilak in Hindi

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए बाल गंगाधर तिलक से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Bal Gangadhar Tilak Biography and Interesting Facts in Hindi.

बाल गंगाधर तिलक के बारे में संक्षिप्त जानकारी

नामबाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak)
जन्म की तारीख23 जुलाई 1856
जन्म स्थानरत्नागिरि, महाराष्ट्र (भारत)
निधन तिथि01 अगस्त 1920
माता व पिता का नामपार्वती बाई गंगाधर / श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक
उपलब्धि1885 - फर्ग्युसन कॉलेज की स्थापना
पेशा / देशपुरुष / स्वतंत्रता सेनानी / भारत

बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak)

एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। तिलक का जन्म एक सुसंस्कृत, मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक पहले रत्नागिरि में सहायक अध्यापक थे और फिर पूना तथा उसके बाद ‘ठाणे" में सहायक उपशैक्षिक निरीक्षक हो गए थे। वे अपने समय के अत्यंत लोकप्रिय शिक्षक थे। उन्होंने ‘त्रिकोणमिति" और ‘व्याकरण" पर पुस्तकें लिखीं जो प्रकाशित हुईं।

बाल गंगाधर तिलक का जन्म

बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को रत्नागिरी, महाराष्ट्र में हुआ था। इनका पूरा नाम लोकमान्य श्री बाल गंगाधर तिलक था। इनके पिता गंगाधर तिलक स्कूल में एक शिक्षक और संस्कृत के विद्वान थे और माता घर में गृहणी थी|

बाल गंगाधर तिलक का निधन

बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु 1 अगस्त 1920 (आयु 64 वर्ष) को बॉम्बे , बॉम्बे स्टेट, ब्रिटिश इंडिया (वर्तमान मुंबई , महाराष्ट्र, भारत) में हुआ था।

बाल गंगाधर तिलक की शिक्षा

बाल गंगाधर तिलक का पैतृक गाँव चिखली था। उनके पिता, गंगाधर तिलक एक स्कूल शिक्षक और संस्कृत के विद्वान थे, जब तिलक सोलह वर्ष के थे। 1871 में तिलक की शादी तबीबाई (नी बाल) से हुई थी विवाह के बाद, उसका नाम बदलकर सत्यभामाबाई कर दिया गया। उन्होंने 1877 में पुणे के डेक्कन कॉलेज से गणित में प्रथम श्रेणी में अपनी कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने एलएलबी पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और 1879 में उन्होंने सरकारी लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। स्नातक करने के बाद, तिलक ने पुणे के एक निजी स्कूल में गणित पढ़ाना शुरू किया। बाद में, नए स्कूल में सहयोगियों के साथ वैचारिक मतभेदों के कारण, वह पीछे हट गए और एक पत्रकार बन गए।

बाल गंगाधर तिलक का करियर

पूना में प्लेग के लक्षण प्रकट होते ही उन्होंने ‘हिन्दू प्लेग अस्पताल" शुरू किया और कई दिनों तक इसके लिए धन जुटाने का कार्य किया था। बाल गंगाधर तिलक ने “स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है“ का नारा दिया था। सन 1885 ई. में ‘डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी" के तत्वावधान में ‘फर्ग्युसन कॉलेज" की स्थापना की थी। उन्होंने 1880 में अपने कॉलेज के कुछ दोस्तों के साथ माध्यमिक शिक्षा के लिए न्यू इंग्लिश स्कूल की स्थापना की, जिसमें गोपाल गणेश अगरकर, महादेव बल्लाल नामजोशी और विष्णुश्री चिपलूनकर शामिल थे। सन 1880 के दशक में तिलक ने दूसरों के साथ मिलकर जिस डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की, वह अभी भी पुणे में फर्गुसन कॉलेज की तरह ही संस्थाएँ चलाती है। सन 1884 में शिक्षा की एक नई प्रणाली बनाने के लिए डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की। तिलक सन् 1895 में ‘शिवाजी स्मरणोत्सव आंदोलन" के साथ जुड़ गए थे। अमेरिका के प्रो. विटने ने सन् 1894 में अपनी मृत्यु से कुछ पहले ‘जर्नल ऑफ दि अमरीकन ओरिएंटल सोसाइटी" में एक लेख लिख कर तिलक के सिद्धांतों की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी। लोकमान्य तिलक ने अपने पत्र केसरी में "देश का दुर्भाग्य" नामक शीर्षक से लेख लिखा जिसमें ब्रिटिश सरकार की नीतियों का विरोध किया। उनको भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के अन्तर्गत राजद्रोह के अभियोग में 27 जुलाई 1897 को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें 6 वर्ष के कठोर कारावास के अंतर्गत माण्डले (बर्मा) जेल में बन्द कर दिया गया। बाल गंगाधर तिलक ने एनी बेसेंट जी की मदद से होम रुल लीग की स्थापना की |होम रूल आन्दोलन के दौरान बाल गंगाधर तिलक को काफी प्रसिद्धी मिली, जिस कारण उन्हें “लोकमान्य” की उपाधि मिली थी। अप्रैल 1916 में उन्होंने होम रूल लीग की स्थापना की थी। इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य भारत में स्वराज स्थापित करना था। लोकमान्य तिलक ने यूँ तो अनेक पुस्तकें लिखीं किन्तु श्रीमद्भगवद्गीता की व्याख्या को लेकर मांडले जेल में लिखी गयी गीता-रहस्य सर्वोत्कृष्ट है जिसका कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है।

बाल गंगाधर तिलक के पुरस्कार और सम्मान

अपने राजनीतिक जीवन में एक स्तर पर उन्हें ब्रिटिश लेखक सर वेलेंटाइन चिरोल द्वारा “भारतीय अशांति का जनक” कहा जाता था।

भारत के अन्य प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी

व्यक्तिउपलब्धि
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नीचे दिए गए प्रश्न और उत्तर प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं। यह भाग हमें सुझाव देता है कि सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। यह प्रश्नोत्तरी एसएससी (SSC), यूपीएससी (UPSC), रेलवे (Railway), बैंकिंग (Banking) तथा अन्य परीक्षाओं में भी लाभदायक है।

महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर (FAQs):

  • प्रश्न: स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है का नारा किसने दिया है?
    उत्तर: बाल गंगाधर तिलक
  • प्रश्न: बाल गंगाधर तिलक ने कब 'डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी' के तत्वावधान में 'फर्ग्युसन कॉलेज' की स्थापना की थी?
    उत्तर: सन 1885 ई.
  • प्रश्न: बाल गंगाधर तिलक कब शिवाजी स्मरणोत्सव आंदोलन के साथ जुड़े थे?
    उत्तर: सन् 1895
  • प्रश्न: गंगाधर तिलक का देहांत कहाँ हुआ था?
    उत्तर: मुम्बई में
  • प्रश्न: वह कौन है जिसने सन् 1876 में अपनी बी.ए. आनर्स की परीक्षा पास की थी?
    उत्तर: बाल गंगाधर तिलक