बिपिन चंद्र पाल का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

आइये जाने बिपिन चंद्र पाल का जीवन परिचय, उपलब्धि और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में। इतिहास की प्रसिद्द तिकड़ी लाल-बाल-पाल की तिकड़ी में पाल, बिपिन चन्द्र पाल ही थे। इनका नाम भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में 'क्रान्तिकारी विचारों के जनक' के रूप में आता है। Biography of Bipin Chandra Pal in Hindi
आइये जाने बिपिन चंद्र पाल का जीवन परिचय, उपलब्धि और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में। इतिहास की प्रसिद्द तिकड़ी लाल-बाल-पाल की तिकड़ी में पाल, बिपिन चन्द्र पाल ही थे। इनका नाम भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में 'क्रान्तिकारी विचारों के जनक' के रूप में आता है। Biography of Bipin Chandra Pal in Hindi

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे बिपिन चंद्र पाल (Bipin Chandra Pal) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए बिपिन चंद्र पाल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Bipin Chandra Pal Biography and Interesting Facts in Hindi.

बिपिन चंद्र पाल के बारे में संक्षिप्त जानकारी

नामबिपिन चंद्र पाल (Bipin Chandra Pal)
जन्म की तारीख07 नवंबर 1858
जन्म स्थानहबीबगंज ज़िला
निधन तिथि20 मई 1932
माता व पिता का नामनारायनीदेवी / रामचंद्र
उपलब्धि1905 - न्यू इंडिया नामक अंग्रेजी पत्रिका के संपादक
पेशा / देशपुरुष / स्वतंत्रता सेनानी / भारत

बिपिन चंद्र पाल (Bipin Chandra Pal)

बिपिन चंद्र पाल का नाम भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में ‘क्रान्तिकारी विचारों के जनक" के रूप में आता है, जो अंग्रेज़ों की चूलें हिला देने वाली ‘लाल" ‘बाल" ‘पाल" तिकड़ी का एक हिस्सा थे।

बिपिन चंद्र पाल का जन्म

बिपिन चंद्र पाल का जन्म 7 नवम्बर 1858 को बंगाल में हबीबगंज ज़िले के पोइल गाँव (वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था। इनके माता-पिता का नाम नारायनीदेवी तथा रामचंद्र था। इनके पिता एक फारसी विद्वान और जमींदार का कम करते थे और माता घर में गृहणी थी| ये अपने माता पिता की इकलोती संतान थे|

बिपिन चंद्र पाल का निधन

बिपिन चंद्र पाल की मृत्यु 20 मई 1932 (आयु 73 वर्ष) को कलकत्ता (अब कोलकाता ), ब्रिटिश भारत में हुई थी।

बिपिन चंद्र पाल की शिक्षा

बिपिन चंद्र पाल ने कलकत्ता विश्वविद्यालय के संबद्ध कॉलेज, चर्च मिशन सोसाइटी कॉलेज (अब सेंट पॉल कैथेड्रल मिशन कॉलेज) में अध्ययन और अध्यापन किया। उनका बेटा निरंजन पाल था

बिपिन चंद्र पाल का करियर

पाल को भारत में क्रांतिकारी विचारों के पिता के रूप में जाना जाता है और वह भारत के स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। पाल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रमुख नेता बने। 1887 में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मद्रास सत्र में, बिपिन चंद्र पाल ने शस्त्र अधिनियम को निरस्त करने के लिए एक मजबूत दलील दी, जो प्रकृति में भेदभावपूर्ण था। लाला लाजपत राय और बाल गंगाधर तिलक के साथ वे लाल-बाल-पाल तिकड़ी के थे जो क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े थे। श्री अरबिंदो घोष और पाल को पूर्ण स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के आदर्शों के इर्द-गिर्द घूमते एक नए राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख प्रतिपादक के रूप में मान्यता दी गई थी। उनके कार्यक्रम में स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा शामिल थी। उन्होंने स्वदेशी के उपयोग और गरीबी और बेरोजगारी को मिटाने के लिए विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का प्रचार किया। वह सामाजिक बुराइयों को रूप से दूर करना चाहते थे और राष्ट्रीय आलोचना के माध्यम से राष्ट्रीयता की भावनाओं को जगाते थे। उन्हें ब्रिटिश उपनिवेशवादियों के साथ असहयोग के रूप में हल्के विरोध का कोई भरोसा नहीं था। उस एक मुद्दे पर, मुखर राष्ट्रवादी नेता के पास महात्मा गांधी के साथ कुछ भी सामान्य नहीं था। अपने जीवन के अंतिम छह वर्षों के दौरान, उन्होंने कांग्रेस के साथ भागीदारी की और एकांत जीवन व्यतीत किया। श्री अरबिंदो ने उन्हें राष्ट्रवाद के सबसे शक्तिशाली भविष्यद्वक्ताओं में से एक के रूप में संदर्भित किया। बिपिन चंद्र पाल ने सामाजिक और आर्थिक बीमारियों को दूर करने के लिए अपने प्रयास किए। उन्होंने जाति व्यवस्था का विरोध किया और विधवा पुनर्विवाह की वकालत की। उन्होंने काम के सप्ताह के 48 घंटे की वकालत की और श्रमिकों के वेतन में बढ़ोतरी की मांग की। उन्होंने गांधी के तरीकों के प्रति अपनी घृणा व्यक्त की, जिसकी उन्होंने "तर्क" के बजाय "जादू" में निहित होने के लिए आलोचना की। बिपिन चन्द्र पाल भारत में “क्रन्तिकारी विचारो के जनक” के नाम से जाने जाते थे। बिपिन चन्द्र पाल ने अपने साथियों के साथ मिलकर ब्रिटिश राज को खत्म करने का बीड़ा उठा लिया था। 1876 मे शिवनाथ शास्त्रीने पाल इनको ब्राम्हण समाज की दिक्षा दी थी।

भारत के अन्य प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी

व्यक्तिउपलब्धि
लक्ष्मी सहगल की जीवनीअस्थायी आज़ाद हिंद सरकार की कैबिनेट में पहली महिला सदस्य
अरुणा आसफ अली की जीवनीसंयुक्त राष्ट्रसंघ महासभा की प्रथम महिला अध्यक्ष
लक्ष्मी सहगल की जीवनीअस्थायी आज़ाद हिंद सरकार की कैबिनेट में पहली महिला सदस्य
लक्ष्मी सहगल की जीवनीअस्थायी आज़ाद हिंद सरकार की कैबिनेट में पहली महिला सदस्य
लाला हरदयाल की जीवनीग़दर पार्टी के संस्थापक
राम मनोहर लोहिया की जीवनीहिन्द किसान पंचायत" के अध्यक्ष
जयप्रकाश नारायण की जीवनीऑल इंडिया कांग्रेस सोशलिस्ट के संस्थापक
शहीद भगत सिंह की जीवनीभारतीय समाजवादी युवा संगठन
मैडम भीकाजी कामा की जीवनीभारत में प्रथम क्रान्तिकारी महिला
बहादुर शाह जफर की जीवनीमुग़ल साम्राज्य के अंतिम बादशाह
बाल गंगाधर तिलक की जीवनीफर्ग्युसन कॉलेज की स्थापना
शहीद उधम सिंह की जीवनीजलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के प्रत्यक्षदर्शी
भीमराव अम्बेडकर की जीवनीआजाद भारत के पहले कानून मंत्री एवं न्याय मंत्री
लाला लाजपत राय की जीवनीपंजाब नेशनल बैंक के संस्थापक
चंद्रशेखर आजाद की जीवनीहिदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के प्रमुख नेता
मंगल पांडे की जीवनीस्वतंत्रता सेनानी
स्वामी विवेकानंद की जीवनीविश्व धर्म परिषद् के भारतीय प्रतिनिधि
अल्लूरी सीताराम राजू की जीवनीभारतीय क्रांतिकारी
रानी लक्ष्मीबाई की जीवनीझांसी राज्य की रानी
रास बिहारी बोस की जीवनीभारतीय स्वातंय संघ के संस्थापक
वीर सावरकर की जीवनीअभिनव भारत संगठन के संस्थापक
सुखदेव थापर की जीवनीनौजवान भारत सभा के संस्थापक
फखरुद्दीन अली अहमद की जीवनीभारत के पांचवे राष्ट्रपति
मोतीलाल नेहरू की जीवनीस्वराज पार्टी के पहले सचिव एवं अध्यक्ष
तात्या टोपे की जीवनीप्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानी
सागरमल गोपा की जीवनीप्रसिद्ध पुस्तक ‘जैसलमेर में गुण्डाराज" के लेखक
पुष्पलता दास की जीवनीखादी और ग्रामोद्योग आयोग की अध्यक्ष
शिवराम राजगुरु की जीवनीदिल्ली सेंट्रल असेम्बली में हमला
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जीवनीआजाद हिन्द फौज के संस्थापक
राम प्रसाद बिस्मिल की जीवनीकाकोरी कांड के सदस्य
अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ की जीवनीभारतीय स्वतंत्रता सेनानी
खुदीराम बोस की जीवनीरिवोल्यूशनरी पार्टी के सदस्य

नीचे दिए गए प्रश्न और उत्तर प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं। यह भाग हमें सुझाव देता है कि सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। यह प्रश्नोत्तरी एसएससी (SSC), यूपीएससी (UPSC), रेलवे (Railway), बैंकिंग (Banking) तथा अन्य परीक्षाओं में भी लाभदायक है।

महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर (FAQs):

  • प्रश्न: बिपिन चंद्र पाल के पिता का क्या नाम था?
    उत्तर: रामचंद्र
  • प्रश्न: बिपिन चन्द्र पाल भारत में किस के नाम से जाने जाते थे?
    उत्तर: क्रन्तिकारी विचारो के जनक
  • प्रश्न: बिपिन चन्द्र पाल ने किसके साथ मिलकर ब्रिटिश राज को खत्म करने का बीड़ा उठाया था?
    उत्तर: अपने साथियों के
  • प्रश्न: किस सन में शिवनाथ शास्त्रीने पाल इनको ब्राम्हण समाज की दिक्षा दी थी?
    उत्तर: 1876
  • प्रश्न: 20 मई, 1932 को किसका निधन हुआ था?
    उत्तर: बिपिन चंद्र पाल का

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *