राम प्रसाद बिस्मिल का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

✅ Published on December 19th, 2021 in प्रसिद्ध व्यक्ति, स्वतंत्रता सेनानी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए राम प्रसाद बिस्मिल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Ram Prasad Bismil Biography and Interesting Facts in Hindi.

राम प्रसाद बिस्मिल का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामराम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil)
जन्म की तारीख11 जून 1897
जन्म स्थानशाहजहाँपुर, (ब्रिटिश भारत)
निधन तिथि19 दिसम्बर 1927
माता व पिता का नाममूलमती / पंडित मुरलीधर
उपलब्धि1925 - काकोरी कांड के सदस्य
पेशा / देशपुरुष / स्वतंत्रता सेनानी / भारत

राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil)

राम प्रसाद बिस्मिल भारत के महान् स्वतन्त्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाविद् व साहित्यकार भी थे। इन्होने भारत की आज़ादी के लिये फांसी के फंदे पर चढ़ गये थे। तथा जब-जब भारत में क्रांतिकारियों की बात होगी इस महान आदमी का नाम ज़रूर आएगा।

राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897 को शाहजहाँपुर में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित मुरलीधर और माता का नाम श्रीमती मूलमती था।
राम प्रसाद बिस्मिल की मृत्यु 19 दिसंबर 1927 (आयु 30 वर्ष) को गोरखपुर , संयुक्त प्रांत , ब्रिटिश भारत में गोरखपुर जेल में फासी लगने के कारण हुई।
उन्होंने घर पर अपने पिता से हिंदी सीखी और उन्हें मौलवी से उर्दू सीखने के लिए भेजा गया। वह अपने पिता की अस्वीकृति के बावजूद एक अंग्रेजी भाषा के स्कूल में भर्ती हुए और शाहजहाँपुर में आर्य समाज में भी शामिल हो गए। बिस्मिल ने देशभक्ति कविता लिखने के लिए एक प्रतिभा दिखाई थी।
18 साल के छात्र के रूप में, बिस्मिल ने हर दयाल के विद्वान और साथी भाई परमानंद पर मृत्युदंड की सजा सुनाई। उस समय वह नियमित रूप से रोजाना शाहजहाँपुर के आर्य समाज मंदिर में जा रहे थे, जहाँ पर परमानंद के मित्र स्वामी सोमदेव ठहरे हुए थे। 11 वर्ष के क्रान्तिकारी जीवन में उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं, उनके जीवन काल में मात्र 11 पुस्तकें ही प्रकाशित हुईं और ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त की गयीं। जो उन्होंने सोमदेव को दिखाई। इस कविता ने भारत पर ब्रिटिश नियंत्रण को हटाने के लिए प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। फरवरी 1922 में चौरी चौरा में कुछ आंदोलनकारी किसानों को पुलिस ने मार डाला। चौरी चौरा के पुलिस स्टेशन पर लोगों ने हमला किया और 22 पुलिसकर्मी जिंदा जल गए। गांधी ने इस घटना के पीछे के तथ्यों का पता लगाए बिना, कांग्रेस के किसी भी कार्यकारी समिति के सदस्य के परामर्श के बिना असहयोग आंदोलन को तत्काल रोकने की घोषणा की। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1922) के गया सत्र में बिस्मिल और उनके युवाओं के समूह ने गांधी का कड़ा विरोध किया। राम प्रसाद बिस्मिल ने ‘सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए- कातिल में है‘ का नारा दिया था। 09 अगस्त 1925 को हुए ‘काकोरी काण्ड" को रामप्रसाद बिस्मिल ने ही अंजाम दिया था, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को दहला दिया था। वर्ष 1915 में भाई परमानन्द की फाँसी का समाचार सुनकर रामप्रसाद ब्रिटिश साम्राज्य को समूल नष्ट करने की प्रतिज्ञा कर चुके थे। सन 1921 में उन्होंने कांग्रेस के अहमदाबाद अधिवेशन में भाग लिया और मौलाना हसरत मोहनी के साथ मिलकर ‘पूर्ण स्वराज" का प्रस्ताव कांग्रेस के साधारण सभा में पारित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मैनपुरी षडयंत्र में शाहजहाँपुर से 6 युवक शामिल हुए थे, जिनके लीडर रामप्रसाद बिस्मिल थे। 1919 से 1920 तक बिस्मिल उत्तर प्रदेश के विभिन्न गाँवों में घूमते रहे और कई पुस्तकों का निर्माण किया। उन्होंने सुशीलमाला के तहत अपने स्वयं के संसाधनों के माध्यम से इन सभी पुस्तकों को प्रकाशित किया - एक योगिक साधना को छोड़कर प्रकाशनों की एक श्रृंखला जो एक प्रकाशक को दी गई थी जो फरार हो गया और उसका पता नहीं लगाया जा सका। जब से ये किताबें मिली हैं। बिस्मिल की एक अन्य पुस्तक, क्रांति गीतांजलि, उनकी मृत्यु के बाद 1929 में प्रकाशित हुई और ब्रिटिश राज द्वारा 1931 में उन पर मुकदमा चलाया गया।
शाहजहाँपुर के शहीद स्मारक समिति ने शाहजहाँपुर शहर के खिरनी बाग मुहल्ले में एक स्मारक की स्थापना की जहाँ बिस्मिल का जन्म 1897 में हुआ था और इसे "अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल स्मारक" नाम दिया था। शहीद की 69 वीं पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर 18 दिसंबर 1994 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल वोरा द्वारा सफेद संगमरमर से बनी एक प्रतिमा का उद्घाटन किया गया था। भारतीय रेलवे के उत्तरी रेलवे क्षेत्र ने शाहजहाँपुर से 11 किलोमीटर (6.8 मील) पर पं। राम प्रसाद बिस्मिल रेलवे स्टेशन का निर्माण किया। भारत सरकार ने 19 दिसंबर 1997 को बिस्मिल के जन्म शताब्दी वर्ष पर एक बहुरंगी स्मारक डाक टिकट जारी किया। उत्तर प्रदेश की सरकार ने उनके नाम पर एक पार्क का नाम रखा था: अमर शहीद पं. राम प्रसाद बिस्मिल उदयन रामपुर जागीर गाँव के पास हैं, जहाँ 1919 में मैनपुरी षडयंत्र मामले के बाद बिस्मिल भूमिगत रहते थे।
व्यक्तिउपलब्धि
लक्ष्मी सहगल की जीवनीअस्थायी आज़ाद हिंद सरकार की कैबिनेट में पहली महिला सदस्य
अरुणा आसफ अली की जीवनीसंयुक्त राष्ट्रसंघ महासभा की प्रथम महिला अध्यक्ष
लाला हरदयाल की जीवनीग़दर पार्टी के संस्थापक
राम मनोहर लोहिया की जीवनीहिन्द किसान पंचायत' के अध्यक्ष
जयप्रकाश नारायण की जीवनीऑल इंडिया कांग्रेस सोशलिस्ट के संस्थापक
शहीद भगत सिंह की जीवनीभारतीय समाजवादी युवा संगठन
मैडम भीकाजी कामा की जीवनीभारत में प्रथम क्रान्तिकारी महिला
बहादुर शाह जफर की जीवनीमुग़ल साम्राज्य के अंतिम बादशाह
बाल गंगाधर तिलक की जीवनीफर्ग्युसन कॉलेज की स्थापना
शहीद उधम सिंह की जीवनीजलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के प्रत्यक्षदर्शी
भीमराव अम्बेडकर की जीवनीआजाद भारत के पहले कानून मंत्री एवं न्याय मंत्री
लाला लाजपत राय की जीवनीपंजाब नेशनल बैंक के संस्थापक
चंद्रशेखर आजाद की जीवनीहिदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के प्रमुख नेता
मंगल पांडे की जीवनीस्वतंत्रता सेनानी
स्वामी विवेकानंद की जीवनीविश्व धर्म परिषद् के भारतीय प्रतिनिधि
अल्लूरी सीताराम राजू की जीवनीभारतीय क्रांतिकारी
रानी लक्ष्मीबाई की जीवनीझांसी राज्य की रानी
रास बिहारी बोस की जीवनीभारतीय स्वातंय संघ के संस्थापक
वीर सावरकर की जीवनीअभिनव भारत संगठन के संस्थापक
बिपिन चंद्र पाल की जीवनीन्यू इंडिया नामक अंग्रेजी पत्रिका के संपादक
सुखदेव थापर की जीवनीनौजवान भारत सभा के संस्थापक
फखरुद्दीन अली अहमद की जीवनीभारत के पांचवे राष्ट्रपति
मोतीलाल नेहरू की जीवनीस्वराज पार्टी के पहले सचिव एवं अध्यक्ष
तात्या टोपे की जीवनीप्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानी
सागरमल गोपा की जीवनीप्रसिद्ध पुस्तक 'जैसलमेर में गुण्डाराज' के लेखक
पुष्पलता दास की जीवनीखादी और ग्रामोद्योग आयोग की अध्यक्ष
शिवराम राजगुरु की जीवनीदिल्ली सेंट्रल असेम्बली में हमला
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जीवनीआजाद हिन्द फौज के संस्थापक
अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ की जीवनीभारतीय स्वतंत्रता सेनानी
खुदीराम बोस की जीवनीरिवोल्यूशनरी पार्टी के सदस्य

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अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर:

प्रश्न: यह नारा किसने दिया था 'सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए- कातिल में है'?
उत्तर: राम प्रसाद बिस्मिल
प्रश्न: राम प्रसाद बिस्मिल के द्वारा उनके जीवनकाल में कितनी पुस्तके प्रकाशित हुई और ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त की गयीं?
उत्तर: 11
प्रश्न: सन 09 अगस्त 1925 को हुए हमले को किसने अंजाम दिया था?
उत्तर: रामप्रसाद बिस्मिल
प्रश्न: वर्ष 1915 में किसकी फाँसी का समाचार सुनकर रामप्रसाद ब्रिटिश साम्राज्य को समूल नष्ट करने की प्रतिज्ञा कर चुके थे?
उत्तर: भाई परमानन्द
प्रश्न: रामप्रसाद बिस्मिल और उनके साथियो को फांसी कब दी गयी थी?
उत्तर: 19 दिसम्बर, 1927

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी:

प्रश्न: यह नारा किसने दिया था 'सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए- कातिल में है'?
Answer option:

      नाना साहब

    ❌ Incorrect

      राजेन्द्रप्रसाद

    ❌ Incorrect

      राम प्रसाद बिस्मिल

    ✅ Correct

      महात्मा गाँधी

    ❌ Incorrect

प्रश्न: राम प्रसाद बिस्मिल के द्वारा उनके जीवनकाल में कितनी पुस्तके प्रकाशित हुई और ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त की गयीं?
Answer option:

      11

    ✅ Correct

      20

    ❌ Incorrect

      15

    ❌ Incorrect

      14

    ❌ Incorrect

प्रश्न: सन 09 अगस्त 1925 को हुए हमले को किसने अंजाम दिया था?
Answer option:

      रामप्रसाद बिस्मिल

    ✅ Correct

      भाई परमानन्द

    ❌ Incorrect

      चन्द्रशेखर आजाद

    ❌ Incorrect

      लाला लाजपत राय

    ❌ Incorrect

प्रश्न: वर्ष 1915 में किसकी फाँसी का समाचार सुनकर रामप्रसाद ब्रिटिश साम्राज्य को समूल नष्ट करने की प्रतिज्ञा कर चुके थे?
Answer option:

      दोस्त अशफाक उल्ला खां

    ❌ Incorrect

      माता श्रीमती मूलमती

    ❌ Incorrect

      पिता पंडित मुरलीधर

    ❌ Incorrect

      भाई परमानन्द

    ✅ Correct

प्रश्न: रामप्रसाद बिस्मिल और उनके साथियो को फांसी कब दी गयी थी?
Answer option:

      19 जनवरी , 1927

    ❌ Incorrect

      19 दिसम्बर, 1927

    ✅ Correct

      18 दिसम्बर, 1927

    ❌ Incorrect

      19 दिसम्बर, 1925

    ❌ Incorrect

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