अल्लूरी सीताराम राजू का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे अल्लूरी सीताराम राजू (Alluri Sitarama Raju) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए अल्लूरी सीताराम राजू से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Alluri Sitarama Raju Biography and Interesting Facts in Hindi.

अल्लूरी सीताराम राजू का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामअल्लूरी सीताराम राजू (Alluri Sitarama Raju)
उपनामअल्लूरी रम्पा रामा राजू
जन्म की तारीख04 जुलाई 1897
जन्म स्थानविशाखापट्टनम, आन्ध्र प्रदेश (भारत)
निधन तिथि07 मई 1924
माता व पिता का नामसूर्यनारायणाम्मा / वेक्टराम राजू
उपलब्धि1922 - भारतीय क्रांतिकारी
पेशा / देशपुरुष / स्वतंत्रता सेनानी / भारत

अल्लूरी सीताराम राजू (Alluri Sitarama Raju)

अल्लूरी सीताराम राजू तत्कालीन समय के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी थे। सन 1920 में अल्लूरी सीताराम पर महात्मा गांधी के विचारों का बहुत प्रभाव पड़ा और उन्होंने आदिवासियों को मद्यपान छोड़ने तथा अपने विवाद पंचायतों में हल करने की सलाह दी। किंतु जब एक वर्ष में स्वराज्य प्राप्ति का गांधी जी का स्वप्न साकार नहीं हुआ तो सीताराम राजू ने अपने अनुयायी आदिवासियों की सहायता से अंग्रेज़ों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करके स्वतंत्र सत्ता स्थापित करने के प्रयत्न आंरभ कर दिए।

अल्लूरी सीताराम राजू का जन्म 04 जुलाई, 1897 ई. को पांडुरंगी गाँव, विशाखापट्टनम, आन्ध्र प्रदेश में हुआ था। इनके पिता का नाम वेक्टराम राजू और इनकी माता का नाम सूर्यनारायणाम्मा था।
अल्लूरी सीताराम राजू का निधन 7 मई 1924 (आयु 25-27 वर्ष) को कोय्युरु , मद्रास प्रेसीडेंसी , ब्रिटिश भारत (वर्तमान आंध्र प्रदेश , भारत ) में अंग्रेजों द्वारा चिंटपल्ले के जंगलों में फंसने के कारण अंग्रजो ने इन्हें एक पेड़ से बांध दिया और इनकी गोली मारकर हत्या कर दी।
समकालीन रिपोर्टों से पता चलता है कि अल्लूरी सीताराम राजू के पास एक शिक्षाविहीन शिक्षा थी, लेकिन 18 साल की उम्र में संन्यासी बनने से पहले उन्होंने ज्योतिष, हर्बलिज्म, हस्तरेखा विज्ञान और घुड़सवारी में विशेष रुचि ली। उनके पिता की मृत्यु स्कूल में होने के बाद हुई और वे उनकी देखभाल में जुट गए। उनके चाचा "राम कृष्णम राजू", पश्चिम गोदावरी जिले के नरसापुर में एक तहसीलदार थे। उन्होंने नरसापुर के "टेलर हाई स्कूल" में अध्ययन किया और फिर अपनी माँ, भाई और बहन के साथ टुनी चले गए। वहाँ रहते हुए, अल्लूरी ने विशाखापत्तनम जिले के क्षेत्रों का दौरा किया और स्वदेशी लोगों की जरूरतों से परिचित हुए। 15 वर्ष की आयु में, वह अपनी मां के गृह नगर विशाखापट्टनम चले गए और श्रीमती ए.वी.एन. कॉलेज। चौथे रूप में असफल होने के बाद उन्हें कॉलेज से बाहर कर दिया गया था
अल्लूरी सीताराम राजू को भारतवर्ष में अल्लूरी रम्पा रामा राजू या अल्लूरी रामाचंद्रा के नाम से भी जाना जाता है। सीताराम राजू की अल्पायु में ही पिता की मृत्यु हो गयी, जिस कारण वे उचित शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके। अपने एक संबंधी के संपर्क से वे अध्यात्म की ओर आकृष्ट हुए तथा 18 वर्ष की उम्र में ही साधु बन गए। सीताराम राजू ने सैन्य संगठन की स्थापना की थी। उन्होंने सम्पूर्ण रम्पा क्षेत्र को क्रांतिकारी आन्दोलन का केंद्र बना लिया। 22 अगस्त, 1922 को उन्होंने पहला हमला चिंतापल्ली में किया। अपने 300 सैनिकों के साथ शस्त्रों को लूटा। उन्होंने आदिवासियों को मद्यपान छोड़ने तथा अपने विवाद पंचायतों में हल करने की सलाह दी। किंतु जब एक वर्ष में स्वराज्य प्राप्ति का गांधी जी का स्वप्न साकार नहीं हुआ तो सीताराम राजू ने अपने अनुयायी आदिवासियों की सहायता से अंग्रेज़ों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करके स्वतंत्र सत्ता स्थापित करने के प्रयत्न आंरभ कर दिए। उसके बाद कृष्णदेवीपेट के पुलिस स्टेशन पर हमला कर किया और विरयया डोरा को मुक्त करवाया। क्रांतिकारी राजू ने अपना संगठन ख़डा करने के साथ उत्तराखंड के क्रांतिकारियों से सम्पर्क किया। यही नहीं गदर पार्टी के नेता बाबा पृथ्वी सिंह को दक्षिण भारत की राज महेन्द्री जेल से छ़ुडाने का भरसक प्रयास किया। ब्रिटिश सरकार ने सीताराम राजू के आंदोलनों को रोकने के लिए ‘असम रायफल्स" नाम से एक सेना का संगठन किया। ‘असम रायफल्स" का नेतृत्त्व उपेन्द्र पटनायक कर रहे थे।

📅 Last update : 2022-06-28 11:44:49