वी. शांताराम का जीवन परिचय: Biography of V. Shantaram in Hindi

भारतीय सिनेमा जगत के पितामह: वी. शांताराम का जीवन परिचय

वी. शांताराम का जीवन परिचय: (Biography of V. Shantaram in Hindi)

वी. शांताराम एक प्रसिद्ध भारतीय निर्देशक, फिल्मकार और शानदार अभिनेता थे। उन्हें भारतीय सिनेमा जगत का पितामह कहा जाता है। उनका जन्म 18 नवम्बर 1901 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक जैन परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने 06 दशक लंबे फिल्मी करियर में लगभग 50 फिल्मों को निर्देशित किया था। एक बहादुर और जिम्मेदार जेलर की जिंदगी पर बनी फिल्म दो आंखे बारह हाथ शांताराम की सबसे चर्चित फिल्म है। भारतीय सिनेमा जगत में अमूल्य योगदान देने वाले महान फिल्मकार वी. शांताराम का 30 अक्तूबर 1990 को मुंबई में देहांत हुआ था। 18 नवंबर, 2017 को वी. शांताराम के 116वें जन्मदिन पर इंटरनेट सर्च कंपनी गूगल ने डूडल के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की है।

Quick Info About Father of Indian Cinema:

नाम वी. शांताराम
जन्म तिथि 18 नवम्बर 1901
जन्म स्थान कोल्हापुर, महाराष्ट्र (ब्रिटिश भारत)
निधन तिथि 30 अक्टूबर 1990
उपलब्धि दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित
उपलब्धि वर्ष 1958

वी. शांताराम से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य: (Important Facts Related to V. Shantaram)

  1. उनका पूरा नाम राजाराम वांकुडरे शांताराम था।
  2. उन्होंने केवल 12 वर्ष की आयु में ही रेलवे वर्कशाप में अप्रेंटिस के तौर पर भी काम किया था।
  3. शांताराम ने अपने करियर की शुरूआत वर्ष 1921 में आई मूक फिल्म सुरेख हरण से की थी। इन्होंने इस फिल्म में बतौर अभिनेता काम किया था।
  4. उन्होंने साल 1927 में अपनी पहली फिल्म नेताजी पालकर को निर्देशित किया था।
  5. उन्होंने वर्ष 1929 में प्रभात कपंनी फिल्मस की स्थापना की थी।
  6. उन्होंने सन् 1946 में डॉक्टर कोटनिस के जीवन पर आधारित फिल्म ‘डॉक्टर कोटनिस की अमर कहानी’ के साथ हिंदी फिल्म जगत में कदम रखा था।
  7. उन्हें वर्ष 1955 में आई फिल्म ‘झनक-झनक पायल बाजे’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फ़िल्मफेयर पुरस्कार दिया गया था।
  8. साल 1957 में आई उनकी फिल्म ‘दो आंखें बारह हाथ’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार प्रदान किया गया था।
  9. 1957 में प्रदर्शित हुई उनकी फिल्म ‘दो आंखें बारह हाथ’ को सर्वश्रेष्ठ फ़ीचर फ़िल्म के लिए राष्ट्रपति के स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था। इसे बर्लिन फ़िल्म फेस्टिवल में सिल्वर बियर और सर्वश्रेष्ठ विदेशी फ़िल्म के लिए सैमुअल गोल्डविन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
  10. वी. शांताराम को सन् 1985 में भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े पुरस्कार ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था।
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