राष्ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) का अर्थ, उद्देश्य, रणनीति, लाभ और तथ्य

राष्ट्रीय पोषण अभियान? (National Nutrition Mission Information in Hindi)

राष्ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) क्या है? (What is National Nutrition Mission?)

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 08 मार्च 2018 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजस्थान के झुंझुनू में राष्ट्रीय पोषण मिशन (National Nutrition Mission-NNM) की शुरुआत की। केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष दिसम्बर में एनएनएम के लिए 2020 तक 9046.17 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी थी और सरकार का उद्देश्य इस मिशन का लाभ दस करोड़ लोगों तक पहुंचाना है। भारत सरकार ने देश में 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों और महिलाओं के बीच कुपोषण को कम करने के लिये पहले से ही कई योजनाएँ लागू की हुई हैं। इन योजनाओं के बावज़ूद देश में कुपोषण तथा संबंधित समस्याओं का स्तर अंतरर्राष्ट्रीय मानकों की तुलना में काफी अधिक है। निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये योजनाओं में एक-दूसरे के साथ तालमेल देखने को नहीं मिलता। राष्ट्रीय पोषण योजना सुदृढ़ व्यवस्था स्थापित करके वांछित तालमेल कायम करेगा, ताकि इस समस्या को कुछ कम किया जा सके।

राष्ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:

राष्ट्रीय पोषण अभियान से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य नीचे दी गयी सूची में दर्शाए गये हैं-

योजना के बिंदु महत्त्वपूर्ण तथ्य
योजना का नाम राष्ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम)
योजना का क्षेत्र कुपोषण के कमी
योजना के शुभारंभ की तारीख 08 मार्च 2018
योजना किसने शुरू की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रबंधक मंत्रालय नीति आयोग

पोषण अभियान के बारे में ताजा जानकारी:

भारत सरकार ने 07 मई 2018 को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 315 जिलों में राष्ट्रीय पोषण मिशन को गति देने के लिए विश्व बैंक के साथ 200 मिलियन डॉलर के ऋण के समझौते पर हस्ताक्षर किये है। पोषण अभियान के अंतर्गत विश्व बैंक के सहायता वाली ‘एकीकृत बाल विकास सेवायें (आईसीडीएस) तंत्र मजबूती और पोषण सुधार परियोजना के तहत चल रही गतिविधियों को सभी जिलों में तीन साल की अवधि में धीरे – धीरे बढ़ाया जाएगा।

राष्ट्रीय पोषण मिशन का उद्देश्य क्या है?

राष्ट्रीय पोषण मिशन का लक्ष्य कुपोषण और कम वजन के बच्चों की जन्मदर को प्रति वर्ष दो फीसदी तक कम करना है। एनएनएम मुख्य उद्देश्य बच्चों, महिलाओं और युवतियों में एनीमिया की कमी को 2020 तक प्रति वर्ष 3 प्रतिशत तक कम करना है। साथ ही वर्तमान में स्टंटिंग को 38.4 फीसदी से 2022 तक 25 फीसदी तक लाना है।

जाने राष्ट्रीय पोषण मिशन में क्या-क्या शामिल है?

  • कुपोषण का समाधान करने हेतु विभिन्न योजनाओं के योगदान का प्रतिचित्रण।
  • अत्यधिक मज़बूत अभिसरण तंत्र (Convergence Mechanism) प्रारंभ करना।
  • सूचना प्रौद्योगिकी आधारित वास्तविक समय (Real Time) निगरानी प्रणाली।
  • लक्ष्यों को प्राप्त करने वाले राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को प्रोत्साहित करना।
  • आईटी आधारित उपकरणों के प्रयोग के लिये आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को प्रोत्साहित करना।
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों द्वारा रजिस्टरों के प्रयोग को समाप्त करना।
  • आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों का कद मापन प्रारंभ करना।
  • सामाजिक लेखा (Social Audit) परीक्षा।

राष्ट्रीय पोषण मिशन की विशेषताएँ (लाभ):

  • राष्ट्रीय पोषण अभियान कार्यक्रम लक्ष्यों के माध्यम से ठिगनेपन, अल्प पोषाहार, रक्त की कमी तथा जन्म के समय बच्चे के वज़न कम होने के स्तर में कमी के उपाय करेगा।
  • इससे बेहतर निगरानी समय पर कार्यवाही के लिये सावधानी जारी करने में तालमेल बिठाने तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये मंत्रालय और राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों को कार्य करने, मार्गदर्शन एवं निगरानी करने के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • इस कार्यक्रम से 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को लाभ पहुँचेगा। सभी राज्यों और ज़िलों को चरणबद्ध रूप से अर्थात्त 2017-18 में 315 ज़िले, वर्ष 2018-19 में 235 ज़िले तथा 2019-20 में शेष ज़िलों को शामिल किया जाएगा।

राष्ट्रीय पोषण मिशन की रणनीति या कार्यान्‍वयन (मॉडल):

  • कुछ समय पूर्व नीति आयोग द्वारा देश में कुपोषण पर नए सिरे से ध्यान देने के लिये राष्ट्रीय पोषण रणनीति (National Nutrition Strategy) शुरू की गई।
  • यह रणनीति भारत के भविष्य के लिये है क्योंकि कुपोषण से मुक्ति पाए बिना आर्थिक विकास का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता है।
  • एक व्यापक सलाहकारी प्रक्रिया के माध्यम से पोषण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये इस रणनीति के तहत एक प्रभावी रूपरेखा तैयार की गई है।
  • कुपोषण मुक्त भारत की परिकल्पना पर आधारित इस रणनीति में कुपोषण से निपटने के उपाय करने के साथ ही बच्चों, किशोरियों और महिलाओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।
  • इसमें विभिन्न तरह के कुपोषण में कमी लाने के लक्ष्य भी तय किये गये हैं और रक्ताल्पता पीड़ित महिलाओं की संख्या में भी तेज़ी से कमी लाने का लक्ष्य तय किया गया है।
  • इस रणनीति के अंतर्गत ऐसी संरचना की परिकल्पना की गई है, जिसमें पोषण के चार सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्वों (स्वास्थ्य सेवाएँ, भोजन, पेयजल और सफाई तथा आय एवं आजीविका) को शामिल किया गया है। ये सभी तत्त्व भारत में अल्प-पोषण की गिरती दर को तीव्रता प्रदान करने में सहायता करते हैं|
  • नीति आयोग ने देश-विदेश के विशेषज्ञों और संस्थानों के साथ विचार-विमर्श कर यह रणनीति बनाई है और इसको हासिल करने का रोडमैप भी सुझाया है।

राष्ट्रीय पोषण योजना में वित्‍तपोषण सहायता (फंडिंग सपोर्ट):

राष्ट्रीय पोषण योजना में केंद्र का कुल योगदान 2849.54 करोड़ रुपए होगा और राज्य सरकारें करीब 1700 करोड़ रुपए का योगदान करेंगी। एनएनएम के कुल बजट आवंटन में 50 फीसदी इंटरनेशनल बैंक ऑफ रिकन्स्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (आईबीआरडी) या अन्य बैंक योगदान करेंगे। शेष राशि राज्यों और केंद्र के बीच 60 और 40 के अनुपात में साझा की जाएगी।

कुपोषण किसे कहते है? (What is Malnutrition?)

कुपोषण का अर्थ: यदि किसी व्यक्ति को लम्बे समय तक शरीर के लिए आवश्यक सन्तुलित आहार नहीं मिलता है तो वह कुपोषण का शिकार हो जाता है। कुपोषण एक गंभीर स्थिति है। कुपोषण से बचने के लिए किसी भी व्यक्ति के आहार में पोषक तत्वों की सही मात्रा लेनी चाहिए है। भोजन में  आपको प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिज सहित पर्याप्त पोषक तत्वों का सेवन करना चाहिये। भोजन आपको स्वस्थ रखने के लिए ऊर्जा और पोषक तत्व प्रदान करता है।

कुपोषण के लक्षण या कुपोषण को कैसे पहचानें: (Symptoms of Malnutrition in Hindi)

यदि मानव शरीर को सन्तुलित आहार के जरूरी तत्त्व लम्बे समय न मिलें तो निम्नलिखित लक्षण दिखाई देने लगते, जिनसे कुपोषण का पता चल जाता है:-

  • शरीर की वृद्धि रुकना।
  • मांसपेशियाँ ढीली होना अथवा सिकुड़ जाना।
  • झुर्रियाँ युक्त पीले रंग की त्वचा।
  • कार्य करने पर शीघ्र थकान आना।
  • मन में उत्साह का अभाव चिड़चिड़ापन तथा घबराहट होना।
  • बाल रुखे और चमक रहित होना।
  • चेहरा कान्तिहीन, आँखें धँसी हुई तथा उनके चारों ओर काला वृत्त बनाना।
  • शरीर का वजन कम होना तथा कमजोरी।
  • नींद तथा पाचन क्रिया का गड़बड़ होना।
  • हाथ पैर पतले और पेट बढ़ा होना या शरीर में सूजन आना (अक्सर बच्चों में)।

भारत में कुपोषण के मुख्य कारण: (Major Causes of Malnutrition in India)

विकासशील देशों में विकसित राष्ट्रों की अपेक्षा कुपोषण की समस्या अत्यधिक है। भारत में कुपोषण का स्तर (विशेष रूप से अल्प-पोषण) बहुत बड़ा है। इसके शिकार अधिकांश किशोर लड़कियां, महिलाएं और बच्चे होते हैं। भारत में कुपोषण के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:-

  • गरीबी: भारत जैसे विकासशील देश में कुपोषण की समस्या अत्यधिक है, क्योंकि धन की कमी के कारण गरीब लोग पर्याप्त, पौष्टिक चीजें जैसे दूध, फल, घी इत्यादि नहीं खरीद पाते है और कुपोषण के शिकार हो जाते हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान लापरवाही: भारत में कम आयु में विवाह कर देना भी स्त्रियों में कुपोषण का मुख्य कारण है। भारत में हर तीन गर्भवती महिलाओं में से एक कुपोषण की शिकार होने के कारण खून की कमी अर्थात् रक्ताल्पता की बीमारी से ग्रस्त हो जाती हैं। हमारे समाज में स्त्रियाँ अपने स्वयं के खान-पान पर ध्यान नहीं देतीं। जबकि गर्भवती स्त्रियों को ज्यादा पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है।
  • अज्ञानता तथा निरक्षरता: अधिकांश लोगों, विशेषकर गाँव, देहात में रहने वाले लोगो को सन्तुलित भोजन के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती है, जिसके कारण वे स्वयं और अपने बच्चों के भोजन में आवश्यक वस्तुओं का समावेश नहीं करते, इस कारण वे स्वयं तो इस रोग से ग्रस्त होते ही हैं साथ ही अपने परिवार को भी कुपोषण का शिकार बना देते हैं।
  • खराब स्वच्छता: भारत में कुपोषण का एक महत्वपूर्ण कारण खराब स्वच्छता प्रथाएं और असुरक्षित पेयजल भी है। आबादी के लिए शौचालयों की कमी के कारण – कम से कम 620 मिलियन लोग (भारत की आबादी का आधा हिस्सा) शौच के लिए घर से बाहर निकलते हैं। जिसके कारण कई रोग होते हैं दस्त भी उन्हीं रोगों में से एक है।

This post was last modified on May 9, 2018 12:47 pm

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