सुचेता कृपलानी का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे सुचेता कृपलानी (Sucheta Kraplani) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए सुचेता कृपलानी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Sucheta Kraplani Biography and Interesting Facts in Hindi.

सुचेता कृपलानी का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामसुचेता कृपलानी (Sucheta Kraplani)
वास्तविक नामसुचेता मजूमदार
जन्म की तारीख25 जून 1904
जन्म स्थानअम्बाला ,पंजाब
निधन तिथि01 दिसंबर 1974
पिता का नाम सुरेन्द्रनाथ मजुमदा
उपलब्धि1963 - भारत के किसी राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री
पेशा / देशमहिला / राजनीतिज्ञ / भारत

सुचेता कृपलानी (Sucheta Kraplani)

यह भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ थीं। एक लेक्चरर के तौर पर उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की तथा बाद में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं, जो भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री थीं। उन्हें सन 1963 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था। वह 02 अक्टूबर 1963 से लेकर 14 मार्च 1967 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहीं थी।

सुचेता कृपलानी का जन्म 25, जून, 1908 में पंजाब के अम्बाला में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनका मूल नाम सुचेता मजूमदार था सुचेता की एक बहन भी थी जिसका नाम शुलेखा था|
सुचेता कृपलानी का निधन 1 दिसंबर 1974 (70 वर्ष की आयु) को नई दिल्ली , भारत में हुआ था। इनकी मृत्यु तब हुई जब यह फैजाबाद (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से एनसीओ उम्मीदवार के रूप में 1971 का चुनाव हार गईं। और 1971 में यह राजनीति से सेवानिवृत्त हो गयी।
सुचेता कृपलानी के पिता सुरेन्द्रनाथ मजुमदार एक चिकित्सा अधिकारी थे जिसके कारण जिसमें कई तबादलों की आवश्यकता हुई। परिणामस्वरूप, उसने कई स्कूलों में भाग लिया, उसकी अंतिम डिग्री सेंट स्टीफन कॉलेज, दिल्ली से इतिहास में स्नातकोत्तर थीं।
सुचेता उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं थी। वह 1939 में नौकरी छोड़कर राजनीति में आईं थी। सुचेता कृपलानी देश की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं। वे बंटवारे की त्रासदी में महात्मा गांधी के बेहद क़रीब रहीं। सुचेता कृपलानी उन चंद महिलाओं में शामिल थीं, जिन्होंने बापू के क़रीब रहकर देश की आज़ादी की नींव रखी। 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह किया और गिरफ्तार की गई। 1941-1942 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महिला विभाग और विदेश विभाग की मंत्री भी रही। उन्होंने 1942 से 1944 तक निरन्तर निरन्तर सफल भूमिगत आंदोलन चलाया फिर 1944 में गिरफ्तार किया गया। 2 अक्तूबर, 1963 से 13 मार्च, 1967 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के रूप उन्होंने कार्य किया था।वर्ष 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने से पहले वह लगातार दो बार लोकसभा के लिए चुनी गईं। सुचेता दिल की कोमल तो थीं, लेकिन प्रशासनिक फैसले लेते समय वह दिल की नहीं, दिमाग की सुनती थीं। उनके मुख्यमंत्री काल के दौरान राज्य के कर्मचारियों ने लगातार 62 दिनों तक हड़ताल जारी रखी, लेकिन वह कर्मचारी नेताओं से सुलह को तभी तैयार हुईं, जब उनके रुख़ में नरमी आई। जबकि सुचेता के पति आचार्य कृपलानी खुद समाजवादी थे। आज़ादी के आंदोलन में भाग लेने के लिए उन्हें जेल की सज़ा हुई। 1946 में वह संविधान सभा की सदस्य चुनी गईं। 1948 से 1960 तक वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव थीं। भारत छोड़ो आंदोलन में सुचेता कृपलानी ने लड़कियों को ड्रिल और लाठी चलाना सिखाया। नोआखली के दंगा पीड़ित इलाकों में गांधी जी के साथ चलते हुए पीड़ित महिलाओं की मदद की। 15 अगस्त, 1947 को संविधान सभा में वन्देमातरम् गाया। सुचेता आखिरी बार 1967 में गोण्डा से लोकसभा के लिए चुनी गईं थी। वे पहले साम्यवाद से प्रभावित हुईं और फिर पूरी तरह गांधीवादी हो गईं। उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी की जिंदगी के ये पहलू उन्हें ऐसी महिला की पहचान देते हैं, जिसमें अपनत्व और जुझारूपन कूट-कूट कर भरा था।
स्वतंत्रता आंदोलन में श्रीमती सुचेता कृपलानी के योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। 1 दिसंबर, 1974 को उनका निधन हो गया। अपने शोक संदेश में श्रीमती इंदिरा गांधी ने कहा कि "सुचेता जी ऐसे दुर्लभ साहस और चरित्र की महिला थीं, जिनसे भारतीय महिलाओं को सम्मान मिलता है।"

📅 Last update : 2021-12-01 00:30:15

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